Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️
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!! सब अधूरा ही रह गया
ख़्वाब, ख्वाहिश, और वो सपने !!

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एहसास तो एक रोज़ सबको होता है
पर बहुत देर हो चुका होता है तब तक...
7😢1💯1
है चंद दिन घना कुहासा, तो उसे स्वीकारा जाए।😶🌫
लाजिम नही हर बार, सूर्य पर प्रश्न उठाया जाए।।
🫠🤓

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तलब : बातें तुम्हारी

ख्वाहिश : एक शाम तुम्हारे साथ.. 🤍🫰

🤌🖇💙💫
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Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️
Explain how??????
Peoples have 2 faces🥲
😵‍💫😬🙄
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💯8🤔1
एक बात बताए 🙂🙂 किसी को बताना मत.......

हम जब किसी से बहस करते हैं तो...…..

दो घंटे भी बहस करने के बाद 🙄🙄🙄....

दुसरे दिन हमको कई बाते याद आती है ये तो हम बोलना ही भूल गए 🙂🙂🙂.…


क्या आप लोगों के साथ भी ऐसा होता है 🤣🤣🤭🤭
🤣8
रही होंगी न जानें, कितनी श्रद्धा सी प्रेमिकाएं,,
जिनके मनोज ने खुद, उन्हें ठुकरा दिया होगा।।


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#12thFail

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Jisko dekhna h join krke saved msg me forward kr lena


7 jan 2024 ko link de kr dene 👍
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😇8🎉1
ना आंखों से छलकते है ना
कागज पर छपते हैं

कुछ दर्द ऐसे हैं जो अंदर ही
अंदर पनपते हैं 🖤🥀🖤
🎉5😢1
आज कुछ घबराए से लगते हो🤧😰
ठंड में कपकपाए से लगते हो
🥶

निखर कर आई है सूरत आपकी
बहुत दिनों बाद नहाए से लगते हो
😂😂
😂😂

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~ एक ख़्वाब
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🤣121😁1😢1🎉1
उदास फिरता है अब मोहल्ले में
बारिश का पानी

कश्ती बनाने वाले बच्चे
मोबाइल से इश्क कर बैठे🖤🥀🖤
💔6👏2🎉1
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Created before 2021

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🔱 !! रुद्राष्टकम !! 🔱

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विंभुं ब्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरींह। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं। मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।।
चिदानंदसंदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।

न यावद् उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।


श्लोक-रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्तिनरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।


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!!....श्री रुद्राष्टकम्...!!

नमामीशमीशान निर्वाणरूपम्।विभुम् व्यापकम् ब्रह्मवेदस्वरूपम्।
निजम् निर्गुणम् निर्विकल्पम् निरीहम्।चिदाकाशमाकाशवासम् भजेऽहम् ॥१॥


हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर तथा सबके स्वामी शिवजी मैं आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित(मायारहित), गुणरहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाशरूप एवं आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले दिगम्बर आपको मैं भजता हूँ।

 

निराकारमोंकारमूलम् तुरीयम्।गिराज्ञानगोतीतमीशम् गिरीशम्।
करालम् महाकालकालम् कृपालम्।गुणागारसंसारपारम् नतोऽहम् ॥२॥


निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय(तीन गुणों से रहित), वाणी,ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलाशपति,विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को मैं प्रणाम करता हूँ।


तुषाराद्रिसंकाशगौरम् गभीरम्।मनोभूतकोटि प्रभाश्रीशरीरम्।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगंगा।लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा ॥३॥


जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सर पर सुन्दर नदी गंगाजी विराजमान हैं , जिनके ललाट पर द्वितीया का चन्द्रमा और गले में सर्प सुशोभित है।


चलत्कुण्डलम् भ्रूसुनेत्रम् विशालम्।प्रसन्नाननम् नीलकण्ठम् दयालम्।
मृगाधीश चर्माम्बरम् मुण्डमालम्।प्रियम् शंकरम् सर्वनाथम् भजामि ॥४॥


जिनके कानों में कुंडल हिल रहे हैं, सुंदर भृकुटी और विशाल नेत्र हैं जो प्रसन्न मुख नीलकंठ और दयालु है, सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुंडमाला पहने हैं उन सबके प्यारे और सब के नाथ कल्याण करने वाले श्री शंकर जी को मैं भेजता हूं।



प्रचण्डम् प्रकृष्टम् प्रगल्भम् परेशम्।अखण्डम् अजम् भानुकोटिप्रकाशम्।
त्रयः शूलनिर्मूलनम् शूलपाणिम्।भजेऽहम् भवानीपतिम् भावगम्यम् ॥५॥


प्रचंड (रूद्र रूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखंड,अजन्मा, करोड़ों सूर्य के समान प्रकाश वाले, तीन प्रकार के शूलों( दुखों )को निर्मूल करने, वाले हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होने वाले, भवानी के पति श्री शंकर जी को मैं भेजता हूं। 


कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।सदा सज्जनानन्ददाता पुरारि।
चिदानन्द सन्दोह मोहापहारि।प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारि ॥६॥


कलाओं  से परे, कल्याण स्वरूप, कल्प का अंत करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुर के शत्रु, सच्चिदानंदघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालने वाले, कामदेव के शत्रु हे प्रभु प्रसन्न होइए प्रसन्न होइए। 


न यावद् उमानाथपादारविन्दम्।भजन्तीह लोके परे वा नराणाम्।
न तावत्सुखम् शान्ति सन्तापनाशम्।प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥७॥


जब तक पार्वती के पति आपके चरण कमलों को मनुष्य नहीं भजते तब तक उन्हें ना तो इस लोक और ना ही परलोक में सुख शांति मिलती है और ना ही उनके पापों का नाश होता है अतः समस्त जीवो के अंदर हृदय में निवास करने वाले प्रभु प्रसन्न होइए। 


न जानामि योगम् जपम् नैव पूजाम्। नतोऽहम् सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम्।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानम्।प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥८॥


मैं ना तो योग जानता हूं ना जप ना ही पूजा जानता हूं हे शंभू मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूं।  यह प्रभु बुढ़ापा तथा जन्म(मरण) के दुख समूह से जलते हुए मुझ दुखी की रक्षा करिए हे ईश्वर हे शंभू मैं आपको नमस्कार करता हूं।

 

रुद्राष्टकमिदम् प्रोक्तम् विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषाम् शम्भुः प्रसीदति॥


भगवान रुद्र की स्तुति का यह अष्टक शंकर जी की तुष्टि(प्रसन्नता) के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया जो मनुष्य से भक्ति पूर्वक पढ़ते हैं उन पर भगवान शंभू प्रसन्न होते हैं।

 
॥ इति श्री रुद्राष्टकम् सम्पूर्णम् ॥



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Forwarded from Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️ (༺♛♡ SHIZUKA♡♛༻)
Holding each other's soul!
It's just smthg irreplaceable and the most beautiful feeling one can ever encounter 🌚

The couple thingie 💗🥰

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@avi_shii
😍10🌚4🙈2🤪1🙊1
इश्क़ में लड़कों की नजरों का शुक्र गुजार रहा करो, 😂😀

तुम्हारी साधारण सी शक्ल को चाँद कहा जाता है।।
🌛🌝🌚


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