तू नहीं कोई और सही ,
कोई और नहीं कोई और सही ,
बहुत लंबी है जमी ,
मिलेंगे लाख हंसी ,
इस जमाने में सनम तू अकेली तो नहीं... 😊
कोई और नहीं कोई और सही ,
बहुत लंबी है जमी ,
मिलेंगे लाख हंसी ,
इस जमाने में सनम तू अकेली तो नहीं... 😊
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🤌🫶🥹❤️
Jisne tumhe nhi dekha usne kya dekha h 👀
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“na zikr kar
na fikar kar,
apne jazbaton ka,
tu bas kadr kar,
jo tera hai woh
tujhe mil hi jayega,
apni baari ka,
bas tu sabr kar”
#Avi | @busyAvi
Ek_khwaab.t.me
na fikar kar,
apne jazbaton ka,
tu bas kadr kar,
jo tera hai woh
tujhe mil hi jayega,
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bas tu sabr kar”
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Reaction krne ke liye bahar se log bulwaye jaye kya 👀🙄
😐11🤷♂3👀2🤷♀1💔1
ऐसी वाणी बोलिए तुरतय झगड़ा होए,
उससे कभी न बोलिए जो अपने तगड़ा होए 😂😂😂😂
उससे कभी न बोलिए जो अपने तगड़ा होए 😂😂😂😂
🤣8
तुमसे इश्क़ नहीं होता तो करना जरूरी नहीं
किसी को बीच राह में छोड़ना मजबूरी नहीं
और खेलने के लिए खिलौने होते हैं
किसी के मासूम दिल को तोड़ना जरूरी नहीं...... 😌
किसी को बीच राह में छोड़ना मजबूरी नहीं
और खेलने के लिए खिलौने होते हैं
किसी के मासूम दिल को तोड़ना जरूरी नहीं...... 😌
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Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️
अमूल्य होते हैं वो लोग, जो गुस्से में भी बात करने की तमीज़ नहीं भूलते। ~ अज्ञात TG: Ek_khwaab.t.me
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समाज ऐसे लोगों को महत्व नही देता। यही कटु सत्य है।🙂
.🫣
समाज ऐसे लोगों को महत्व नही देता। यही कटु सत्य है।🙂
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💯13
Today I found this awesome message for you 💖 I hope u will real this ☺️
~~~~``
सितंबर महीना आ चुका है। इस वर्ष के आठ महत्वपूर्ण महीने बीत चुके हैं। देखो दोस्त वक्त ऐसे ही तेज़ी से निकलता रहेगा और तुम बिस्तर पर लेटे लेटे सबकुछ गँवा दोगे। शरीर और मन को एक सीध में लाना होगा और कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना होगा वरना जो हस्र होगा भविष्य में इसकी कभी भरपाई नही हो पाएगी। हम केवल बदलता हुआ दिन, सप्ताह, महीना, वर्ष देखते रहते हैं और कुछ कर नही पाते। क्योंकि हमें खुद पर भरोसा नहीं रहा, हमें उस ब्रह्मांड के मालिक से कोई उम्मीद नहीं रही। हमने कुछ वर्ष बिना कुछ सोचे और किये बीता दिए जिसका परिणाम यह निकला कि आज हमें खुद की काबिलियत पर भी शक है। हम जीवन मे बड़ा से बड़ा करना चाहते हैं, हम कुछ बड़ा प्राप्त करना चाहते हैं पंरतु केवल चाहते हैं...उसके लिए हम शत प्रतिशत दे नहीं पाते और जब उम्र निकल चुकी होती है, समाज, परिवार, दुनिया, रिश्तेदारों के दवाब को झेल नहीं पाते और फिर जन्म लेता है अवसाद, चुभन, पछतावा और न जाने कितनी तकलीफें जो कोई समझ ही नहीं सकता। आज मौका है, दस्तूर है, मन को पकड़ो और जीवन का जो भी लक्ष्य हो उसके प्रति समर्पित हो जाओ। शुरुआत धीमी होगी कोई बात नहीं। धीमी शुरुआत बिस्तर पर पड़े रहने और फोन चलाने से कहीं बेहतर होती है। हमे प्लान बनाना है, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक और उस को पूरा करने में ही खुद को झोंक देना ह। देखो ऐसा है आपको मस्ती करते देख लोग खुश होते हैं क्योंकि उन्हें पता है बाद में तुम पर हँसने में उन्हें मजा आएगा। कुछ लोग चाहते हैं कि आप कोई काम न करें केवल घूमो फ़िरो और समय बर्बाद करो। आपको कभी कोई मुफ्त में दिशा नहीं दिखायेगा। आपको कभी कोई मोटिवेट नहीं करेगा। आपको कभी कोई ये नहीं बतायेगा की आगे कैसे बढ़ा जाता है। वो केवल आप हैं जो खुद को राह दिखा पाएंगे और केवल आप हैं जो जीवन में कुछ कर पाएंगे। हमारी झूठी उम्मीदे भी नष्ट हो जाती है जब हमारे घरवाले हमारी नक्कारी पर थूकते हैं। हर बात में ताने नज़र आती है।
मैं केवल यह बताना चाहता हूं कि समय का दुरुपयोग मत करो। सबकुछ आँखों के सामने है। कितने उदाहरण हैं जहाँ लोग बेरोजगारी में आमहत्या कर रहे, सपने पूरे नही होते तो ज़हर खा लेते हैं और न जाने कितने कष्ट स्वयं को देते हैं। इसलिए ऐसी नौबत न आये इसके लिए अभी इस जवानी को सही दिशा में लगाओ। सही ज्ञान और उसका क्रियान्वयन से ही सब कुछ प्राप्त होता है। हम सभी को रास्ते पता है, परन्तु हम अपनी मन की सुस्ती और कम्फर्ट ज़ोन के कारण कुछ नहीं कर सकते। प्रेमिका, फोन, बिस्तर, आराम, बाहर का खाना, सुस्ती, नशा इत्यादि ये दुश्मन हैं हमारे नक्कारी का। इसीलिए ठान लो जब तक सफ़ल न हो जाये तब तक हम एक सीध में बढ़ते चलेंगे और निखरते रहेंगे। विश्वास मजबूत हो तो चाँद पर भी पहुचा जा सकता है फिर भी हमारा लक्ष्य तो पृथ्वी पर ही स्थित है।
उम्मीद है जीवन सबका सुखद होगा। अपने प्रयासों के बल पर और सुस्ती, और टालमटोल को त्याग कर सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
Source : copy paste
सितंबर महीना आ चुका है। इस वर्ष के आठ महत्वपूर्ण महीने बीत चुके हैं। देखो दोस्त वक्त ऐसे ही तेज़ी से निकलता रहेगा और तुम बिस्तर पर लेटे लेटे सबकुछ गँवा दोगे। शरीर और मन को एक सीध में लाना होगा और कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना होगा वरना जो हस्र होगा भविष्य में इसकी कभी भरपाई नही हो पाएगी। हम केवल बदलता हुआ दिन, सप्ताह, महीना, वर्ष देखते रहते हैं और कुछ कर नही पाते। क्योंकि हमें खुद पर भरोसा नहीं रहा, हमें उस ब्रह्मांड के मालिक से कोई उम्मीद नहीं रही। हमने कुछ वर्ष बिना कुछ सोचे और किये बीता दिए जिसका परिणाम यह निकला कि आज हमें खुद की काबिलियत पर भी शक है। हम जीवन मे बड़ा से बड़ा करना चाहते हैं, हम कुछ बड़ा प्राप्त करना चाहते हैं पंरतु केवल चाहते हैं...उसके लिए हम शत प्रतिशत दे नहीं पाते और जब उम्र निकल चुकी होती है, समाज, परिवार, दुनिया, रिश्तेदारों के दवाब को झेल नहीं पाते और फिर जन्म लेता है अवसाद, चुभन, पछतावा और न जाने कितनी तकलीफें जो कोई समझ ही नहीं सकता। आज मौका है, दस्तूर है, मन को पकड़ो और जीवन का जो भी लक्ष्य हो उसके प्रति समर्पित हो जाओ। शुरुआत धीमी होगी कोई बात नहीं। धीमी शुरुआत बिस्तर पर पड़े रहने और फोन चलाने से कहीं बेहतर होती है। हमे प्लान बनाना है, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक और उस को पूरा करने में ही खुद को झोंक देना ह। देखो ऐसा है आपको मस्ती करते देख लोग खुश होते हैं क्योंकि उन्हें पता है बाद में तुम पर हँसने में उन्हें मजा आएगा। कुछ लोग चाहते हैं कि आप कोई काम न करें केवल घूमो फ़िरो और समय बर्बाद करो। आपको कभी कोई मुफ्त में दिशा नहीं दिखायेगा। आपको कभी कोई मोटिवेट नहीं करेगा। आपको कभी कोई ये नहीं बतायेगा की आगे कैसे बढ़ा जाता है। वो केवल आप हैं जो खुद को राह दिखा पाएंगे और केवल आप हैं जो जीवन में कुछ कर पाएंगे। हमारी झूठी उम्मीदे भी नष्ट हो जाती है जब हमारे घरवाले हमारी नक्कारी पर थूकते हैं। हर बात में ताने नज़र आती है।
मैं केवल यह बताना चाहता हूं कि समय का दुरुपयोग मत करो। सबकुछ आँखों के सामने है। कितने उदाहरण हैं जहाँ लोग बेरोजगारी में आमहत्या कर रहे, सपने पूरे नही होते तो ज़हर खा लेते हैं और न जाने कितने कष्ट स्वयं को देते हैं। इसलिए ऐसी नौबत न आये इसके लिए अभी इस जवानी को सही दिशा में लगाओ। सही ज्ञान और उसका क्रियान्वयन से ही सब कुछ प्राप्त होता है। हम सभी को रास्ते पता है, परन्तु हम अपनी मन की सुस्ती और कम्फर्ट ज़ोन के कारण कुछ नहीं कर सकते। प्रेमिका, फोन, बिस्तर, आराम, बाहर का खाना, सुस्ती, नशा इत्यादि ये दुश्मन हैं हमारे नक्कारी का। इसीलिए ठान लो जब तक सफ़ल न हो जाये तब तक हम एक सीध में बढ़ते चलेंगे और निखरते रहेंगे। विश्वास मजबूत हो तो चाँद पर भी पहुचा जा सकता है फिर भी हमारा लक्ष्य तो पृथ्वी पर ही स्थित है।
उम्मीद है जीवन सबका सुखद होगा। अपने प्रयासों के बल पर और सुस्ती, और टालमटोल को त्याग कर सभी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।
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She: Teri Aankhen batati hai tujhe
mujhse mohabbat hai,
Magar Dil ki tasalli ko jara izhaar
Ho jaye.”
TG: Ek_khwaab.t.me
Follow us on IG: https://instagram.com/ek_khwaab.t.me
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@Divinemantra7
Koi to join kr lo 2k kr do
Cross promotion ke liye accept n kr rhe h😒
Bezzati ho jati h yrr 🤐
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👀5🎉1
उम्र के उस पड़ाव पर है
जहाँ शौक खत्म हो रहे
अकेला पन भा रहा
समझ ना आ रहा क्या हो रहा
बस जिंदगी गुजर रही ।।
🙂🥀
जहाँ शौक खत्म हो रहे
अकेला पन भा रहा
समझ ना आ रहा क्या हो रहा
बस जिंदगी गुजर रही ।।
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Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️
तू नहीं कोई और सही , कोई और नहीं कोई और सही , बहुत लंबी है जमी , मिलेंगे लाख हंसी , इस जमाने में सनम तू अकेली तो नहीं... 😊
तू नहीं तो कोई और नहीं,
न फिर कोई और ,
होगी बहुत लंबी जमी,
शायद मिलेंगी भी लाख हसी,
पर इस जमाने और नादान दिल में सनम तेरे सिवा कोई और नहीं 😌
🤭🤭🙈
न फिर कोई और ,
होगी बहुत लंबी जमी,
शायद मिलेंगी भी लाख हसी,
पर इस जमाने और नादान दिल में सनम तेरे सिवा कोई और नहीं 😌
🤭🤭🙈
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मोहब्बत है मुझे अपने अकेलेपन से,
यह सुकून मुझे कही और नहीं मिलता है 😌
यह सुकून मुझे कही और नहीं मिलता है 😌
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