Don't cover a judge by...🙄 ufff
Don't book a cover by its judge.
I mean Don't.....🙄 whatever, just don't do it.
Don't book a cover by its judge.
I mean Don't.....
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😁8🗿3🤪2
One sided effort always hurts❤️🩹🙂
❤6❤🔥3
Bdi ajib hoti h yade
Kabhi hasati h😁
Kabhi rulati h🥺
Kabhi hasati h😁
Kabhi rulati h🥺
👌7😁2😢2
Today is a very special day for me 💌 🌻
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😍8👏2❤1🥰1🐳1
एक-तुम्हारा ख़्याल,
दूसरा-ख़्यालों में तुम।😍
दूसरा-ख़्यालों में तुम।😍
🔥8❤2😍2🦄2
From Bestfriends to Strangers Again !!💔
But this time with a lot of memories, secrets , weakness and much more ...🥺💔
@Kralice_28🦋✨
But this time with a lot of memories, secrets , weakness and much more ...🥺💔
@Kralice_28🦋✨
💔10🤔1
Someone said
"Naaraz waha hua jaata
hai jaha aapki narazgi ki
fikar ho "
And that hit me hard 💔🎯
@Kralice_28🦋✨
"Naaraz waha hua jaata
hai jaha aapki narazgi ki
fikar ho "
And that hit me hard 💔🎯
@Kralice_28🦋✨
❤6🔥1
अपने फोन में कभी किसी दूसरी लड़की की फोटू 📱 नहीं रखनी चाहिए...
कारण शाम को बताऊंगा , अभी मेडिकल आया हूं😢
कारण शाम को बताऊंगा , अभी मेडिकल आया हूं
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😁11❤1
अगर जो चाहा है,वो नहीं मिला तो एक बार जो मिला है उसे चाह कर देखो❤️🩹❤️🩹
❤13
मेरे लिखें लफ्ज़ ही पढ़ पाया वो बस,
मुझे भी पढ़ पाए इतनी उसकी तालीम
नहीं...!!
मुझे भी पढ़ पाए इतनी उसकी तालीम
नहीं...!!
👌7💔4❤3
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❤9😁1
Ab lagta haii .... Theek kaha thaa Galib ne
ab lagta haii Theek kaha thaa Galib ne ...
Badhte Badhte dard
dawa bann jata haii ❤️🩹...
@Kralice_28🦋✨
ab lagta haii Theek kaha thaa Galib ne ...
Badhte Badhte dard
dawa bann jata haii ❤️🩹...
@Kralice_28🦋✨
💔7❤2
क्या लिखूँ तुम्हारे बारे में
तुमसे जुड़ी हज़ारो स्मृतियाँ है व्यक्त करने को
पर एक शब्द पढ़ा था कहीं tacenda जिसका अर्थ है की कुछ बातें अव्यक्त ही बेहतर होती हैं
पर अब जो तुमसे ये बड़बोला पन जो मुझमे ही था कहीं अब सीख गयी हूँ तो कुछ तो कहूंगी ही
याद है जब पहली बार मिली थी तुमसे
मस्तिष्क में तो शंकाएं भर लायी थी पर मन तुमसे मिलते ही स्वतंत्र अनुभव कर रहा था
ऐसा लग रहा था मानो बड़े ही परिचित के साथ हो
आज तक पता ही नहीं चल पाया
जो अनजाना सा भय मन को कभी कुछ अपनों के सामने भी घेर लेता था
तुम्हारे साथ होने पर वो भय कहीं ओझल सा हो गया था
खैर पहली मुलाकात के तो अनुभव बहुत है
हमारी दूसरी मुलाकात के लिए मिला अंतराल और भय उत्पन्न कर रहा था
शायद इसलिए भी क्योंकि अजनबी स्थान पर किसी से अपनेपन की आशा नहीं थी साथ ही
मन के एक कोने में ये भी बात थी कहीं की अब जब प्रभु स्वयं जरिया बने है तुमसे मिलाने का तो कोई तो कारण होगा ही
कारण मुझे आज भी नहीं पता बस अनुभव है
हमारे साथ रहने के, साथ चलने के
याद है वो दिन जब मेरा कहीं मन नहीं लग रहा था
और पता नही कैसे खुदको मना करते हुए भी तुमसे मिलने आ पहुँची थी
कितना ही समय हमने साथ बिताया था और वो भी नि:शब्द
कितनी बार बस तुम्हे निहारते हुए अपने मन का प्रतिबिंब देखा
और तब अपनी उलझनों के उत्तर तुम्हारे नेत्रों में दिख जाते
मस्तिष्क आज भी नहीं समझ पाता की वो मन जो एक सभा मे बैठा अकेलेपन का अनुभव करता है कैसे बस एक तुम्हारी उपस्थिति से सुकून पाता है
कैसे तुम्हारे साथ घंटो बैठकर भी उसे यही लगता की बस अभी ही तो आये थे तुम
बहुत कुछ सीखा है तुमसे
कैसे कोलाहल से भरे संसार में अपने कर्तव्यों की पूर्ति कर अंतर्मन को शांति देना
अपेक्षा रहित प्रेम बांटना
जाति, वर्ग आदि का भेद न करना
सभी को समभाव से देखना
बिना किसी तुलना के अपनी धुन में मगन रहना
अब ये तो पता नहीं की ये साथ कब तक रहेगा
परंतु मेरे मन की जो चाह थी की एक ऐसा रिश्ता हो
जो बस साथ निभाना जाने
भले ही कम समय के लिए मिला हो
पर मुझे स्वयम् से मिलने की ओर अग्रसर करे
हमेशा ही आभारी रहूँगी तुम्हारी
इस अनजाने से पर पक्के रिश्ते के लिए
इन सभी अनुभवों के लिए
साथ ही ये सिखाने के लिए
सब पार लग जायेगा... काहे से ई बनारस है महाराज
तुमसे जुड़ी हज़ारो स्मृतियाँ है व्यक्त करने को
पर एक शब्द पढ़ा था कहीं tacenda जिसका अर्थ है की कुछ बातें अव्यक्त ही बेहतर होती हैं
पर अब जो तुमसे ये बड़बोला पन जो मुझमे ही था कहीं अब सीख गयी हूँ तो कुछ तो कहूंगी ही
याद है जब पहली बार मिली थी तुमसे
मस्तिष्क में तो शंकाएं भर लायी थी पर मन तुमसे मिलते ही स्वतंत्र अनुभव कर रहा था
ऐसा लग रहा था मानो बड़े ही परिचित के साथ हो
आज तक पता ही नहीं चल पाया
जो अनजाना सा भय मन को कभी कुछ अपनों के सामने भी घेर लेता था
तुम्हारे साथ होने पर वो भय कहीं ओझल सा हो गया था
खैर पहली मुलाकात के तो अनुभव बहुत है
हमारी दूसरी मुलाकात के लिए मिला अंतराल और भय उत्पन्न कर रहा था
शायद इसलिए भी क्योंकि अजनबी स्थान पर किसी से अपनेपन की आशा नहीं थी साथ ही
मन के एक कोने में ये भी बात थी कहीं की अब जब प्रभु स्वयं जरिया बने है तुमसे मिलाने का तो कोई तो कारण होगा ही
कारण मुझे आज भी नहीं पता बस अनुभव है
हमारे साथ रहने के, साथ चलने के
याद है वो दिन जब मेरा कहीं मन नहीं लग रहा था
और पता नही कैसे खुदको मना करते हुए भी तुमसे मिलने आ पहुँची थी
कितना ही समय हमने साथ बिताया था और वो भी नि:शब्द
कितनी बार बस तुम्हे निहारते हुए अपने मन का प्रतिबिंब देखा
और तब अपनी उलझनों के उत्तर तुम्हारे नेत्रों में दिख जाते
मस्तिष्क आज भी नहीं समझ पाता की वो मन जो एक सभा मे बैठा अकेलेपन का अनुभव करता है कैसे बस एक तुम्हारी उपस्थिति से सुकून पाता है
कैसे तुम्हारे साथ घंटो बैठकर भी उसे यही लगता की बस अभी ही तो आये थे तुम
बहुत कुछ सीखा है तुमसे
कैसे कोलाहल से भरे संसार में अपने कर्तव्यों की पूर्ति कर अंतर्मन को शांति देना
अपेक्षा रहित प्रेम बांटना
जाति, वर्ग आदि का भेद न करना
सभी को समभाव से देखना
बिना किसी तुलना के अपनी धुन में मगन रहना
अब ये तो पता नहीं की ये साथ कब तक रहेगा
परंतु मेरे मन की जो चाह थी की एक ऐसा रिश्ता हो
जो बस साथ निभाना जाने
भले ही कम समय के लिए मिला हो
पर मुझे स्वयम् से मिलने की ओर अग्रसर करे
हमेशा ही आभारी रहूँगी तुम्हारी
इस अनजाने से पर पक्के रिश्ते के लिए
इन सभी अनुभवों के लिए
साथ ही ये सिखाने के लिए
सब पार लग जायेगा... काहे से ई बनारस है महाराज
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