Shayari एक ख़्वाब | • EK KHWAAB ᥫ᭡ ☻️
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Est. 31May,2022
!! सब अधूरा ही रह गया
ख़्वाब, ख्वाहिश, और वो सपने !!

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मरते वक्त लिखूंगा उसका नाम हथेलियों पर
हम खाली हाथ जाने वालों में से नहीं है
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मैंने तुझे शब्दों में महसूस किया है
लोग तो तस्वीर पसंद करते है
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"तुम" याद आओगे, यकीन था मुझे
इतना आओगे, अंदाजा नहीं था 🥺🥺
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“मंदिरों-मस्ज़िदों सी हो जाती हैं आम सी दहलिजें भी,
इश्क बरसों जहां किसी की राह तकता हो।”
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इतना भी तकलीफ ना दे ऐ ज़िन्दगी...
कि दुआओं में तुझसे ज्यादा मौत का जिक्र करू...!!

#copy
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बरसे हुए पानी से सीखे वफाएं कोई...
बादल तो अक्सर शहर बदल लेते हैं...!!
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टूट कर भी कमबख्त धड़कता रहता है,
मैंने इस दुनिया में दिल सा कोई वफादार नहीं देखा।
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लिबास से तय मत करो तुम मेरी हैसियत
अभी कफन ओढ़ लूं तो कांधे पर उठाए फिरोगे।


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केसा होता होगा सुकून ,
देखेंगे एक रोज ठहरकर हम !!
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रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 6

लगे लोग पूजने कर्ण को कुंकुम और कमल से,
रंग-भूमि भर गयी चतुर्दिक् पुलकाकुल कलकल से।
विनयपूर्ण प्रतिवन्दन में ज्यों झुका कर्ण सविशेष,
जनता विकल पुकार उठी, 'जय महाराज अंगेश।

'महाराज अंगेश!' तीर-सा लगा हृदय में जा के,
विफल क्रोध में कहा भीम ने और नहीं कुछ पा के।
'हय की झाड़े पूँछ, आज तक रहा यही तो काज,
सूत-पुत्र किस तरह चला पायेगा कोई राज?'

दुर्योधन ने कहा-'भीम ! झूठे बकबक करते हो,
कहलाते धर्मज्ञ, द्वेष का विष मन में धरते हो।
बड़े वंश से क्या होता है, खोटे हों यदि काम?
नर का गुण उज्जवल चरित्र है, नहीं वंश-धन-धान।

'सचमुच ही तो कहा कर्ण ने, तुम्हीं कौन हो, बोलो,
जनमे थे किस तरह? ज्ञात हो, तो रहस्य यह खोलो?
अपना अवगुण नहीं देखता, अजब जगत् का हाल,
निज आँखों से नहीं सुझता, सच है अपना भाल।

कृपाचार्य आ पड़े बीच में, बोले 'छिः! यह क्या है?
तुम लोगों में बची नाम को भी क्या नहीं हया है?
चलो, चलें घर को, देखो; होने को आयी शाम,
थके हुए होगे तुम सब, चाहिए तुम्हें आराम।'

रंग-भूमि से चले सभी पुरवासी मोद मनाते,
कोई कर्ण, पार्थ का कोई-गुण आपस में गाते।
सबसे अलग चले अर्जुन को लिए हुए गुरु द्रोण,
कहते हुए -'पार्थ! पहुँचा यह राहु नया फिर कौन?
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#rashmirathi
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रश्मिरथी संपूर्ण अनुक्रमणिका💠

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मैंने ही गाया है, एक बार जरूर सुनें प्लीज़ 🥺

︎ ●────────── 00:58


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हंसते हुए चेहरे को देखकर

उसके गम का पता लगाना बड़ा मुश्किल है❤️❤️
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दर्द उसी इंसान को मिलता है,
जो हर रिश्ता दिल से निभाता है,

राधेकृष्णा
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